मैं शायर, मेरा खयाल हो तुम...
पायल छनकती पाँवों की
तुम हरियाली हो गावों की
ये गीत गजल मेरे तुमपर
और धुन रचाई हवाओं की
पतझड़ में लगती हो सावन सी
तुम रेगिस्तान मे कानन सी
झुकी नज़र से देख मुझे
क्यो रहती हो अनजानों सी
गुमान तो देख इस मौसम का
क्या तुझसे मिलने आता है ?
मुझको लगता है अंदाज़ तेरा
ये भी खुद अपनाता है ।
आज दिल की महफ़िल बदनाम हो गई
तेरे नाम से ही शाम हो गई
बेदर्दी, एक आवाज़ तो दी होती
तेरी खामोशी मेरे लिए जुकाम हो गई
फूलों का उपवन हो तुम
तसव्वुर में शामिल हो तुम
बुरा न मानो बातों का
मैं शायर, मेरा खयाल हो तुम ।
Written by
Maharudra Doiphode
क्यो रहती हो अनजानों सी
गुमान तो देख इस मौसम का
क्या तुझसे मिलने आता है ?
मुझको लगता है अंदाज़ तेरा
ये भी खुद अपनाता है ।
आज दिल की महफ़िल बदनाम हो गई
तेरे नाम से ही शाम हो गई
बेदर्दी, एक आवाज़ तो दी होती
तेरी खामोशी मेरे लिए जुकाम हो गई
फूलों का उपवन हो तुम
तसव्वुर में शामिल हो तुम
बुरा न मानो बातों का
मैं शायर, मेरा खयाल हो तुम ।
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Maharudra Doiphode
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