बस इतना ही कहना है कि...
बस इतना ही कहना है कि...
जरा अदब से चलिए
कही पदम् पैरो के नीचे न
आकर दब जाए ।
बेचारे बहोत नाजुक है
कही मरोड़ न जाए ।
बस इतना ही कहना है कि...
ऐसा मुझपर व्यथित रहना ठीक नहीं,
ये आपका क्रोध, ये गुमान,
ये मुझको नजरअंदाज करना ठीक नहीं ।
बस इतना ही कहना है कि...
फिका है आब-ए-आईना सामने तुम्हारे
यही सच है।
बेकार है चितवन, ये नजारा सामने तुम्हारे
यही सच है।
बस इतना ही कहना है कि...
ये फ़ितरत छोड़ दो
निगार हु मैं आपका,
गुमसुम से हो आप
ये रिवाज छोड़ दो
मुलाजिम हु मैं आपका
Poet - Maharudra Doiphode
"Maharudra Doiphode Hindi Poems"
"Bas Itna Hi Kahena Hai Ki Kavita"
"Poet - Maharudra Doiphode"
"Maharudra Doiphode Gazals"
Copyright © 2020 Maharudra Doiphode.

0 Comments