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दुआ मे उसको माँग कर देखते है - Dua Me Usko Mang Kar Dekhte Hai Rudra Poem
दुआ मे उसको माँग कर देखते है - रुद्र टपकते हुए कतरा-ए-शबनम को देखते है पीते नही…
समजावुनी व्यथेला समजावता न आले - सुरेश भट समजावुनी व्यथेला समजावता न आले ! मज दोन आसवांना हूलकावता न आले ! सर एक श्रावणाची आली.. निघून गेली.. माझ्या …
FULL SHOW »ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा - गुलजार ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा अपने साए से चौंक जाते हैं उम्र गुज़री है…
FULL SHOW »दर्द हल्का है साँस भारी है - गुलजार दर्द हल्का है साँस भारी है जिए जाने की रस्म जारी है आप के बाद हर घड़ी हम ने आप के साथ ही गुज…
FULL SHOW »दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई - गुलज़ार दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे एहसान उतारता है कोई आईना देख के तसल्ली हुई हम को इस घर में जा…
FULL SHOW »चल रहा हूँ अकेला बहारों को बुलाते हुए कुछ नगमे गुनगुनाते हुए मंजिल के आगाज़ मे दिल में कुछ दबाते हुए चल रहा हूँ अकेला किसी और की नफ़रत में दिल टूट गया…
FULL SHOW »अपनी महफ़िल से ऐसे न टालो मुझे - कन्हैयालाल नंदन अपनी महफ़िल से ऐसे न टालो मुझे मैं तुम्हारा हूँ, तुम तो सँभालो मुझे ज़िंदगी! सब तुम्हारे भरम ज…
FULL SHOW »बुलाती है मगर - राहत इंदोरी बुलाती है मगर जाने का नईं वो दुनिया है उधर जाने का नईं ज़मीं रखना पड़े सर पर तो रक्खो चलो हो तो ठहर जाने का नईं https://g…
FULL SHOW »क्या है मेरी बारी में - हरिवंश राय बच्चन जिसे सींचना था मधुजल से सींचा खारे पानी से, नहीं उपजता कुछ भी ऐसी विधि से जीवन-क्यारी में। क्या है मेरी बार…
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दुआ मे उसको माँग कर देखते है - रुद्र टपकते हुए कतरा-ए-शबनम को देखते है पीते नही…
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