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प्यार बहोत महंगा है - राहत indori

आज तक तुमने खिलौने ही ख़रीदे होंगे दिल है ये दिल मेरे सरकार बहुत महंगा है

सलाम जननीस जगताच्या - Salam Jananis Jagatachya Mahila Din Poem

सलाम जननीस जगताच्या - महारुद्र


तो   आहे    फक्त    सारथी    रथाचा    अर्जुनाच्या
कित्येक    युगे     चालली     छळात     द्रौपदीच्या 

न  येणे    कृष्ण   आता     तूच     शस्त्र    उचलावे 
अन   का  करावी  याचना तू दरबारी दुशासनांच्या

पेटवून    ज्योत     तेजवून     टाक    संपूर्ण    धरा 
नको     उगाच    येऊ    आश्रयी      काजवयांच्या 

जाणीव   म्हणून  शिवलेले  ओठ   उघड कधीतरी 
भरडू   नकोस   असे    तू   जात्यात    संस्कृतीच्या 

पायी  जखडल्या  बेड्या  तोडून  टाकाव्यात आता 
आणि    उडावे       उंच     भरारीस      गगणाच्या 

द्याव्यात  झटकून साऱ्या व्यथा  निर्बल, दुर्बलतेच्या 
अन  यावे  बळ  धाडसाचे   अहिल्या, जिजाऊंच्या

काही   शब्दांत  माझ्या  करितो  सांगता   कवितेची 
अन एक इवलासा सलाम माझा जननीस जगताच्या





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