पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ था
हर नग़्मा-ए-कृष्ण बाँसुरी का
- हसरत मोहानी
दुआ मे उसको माँग कर देखते है - रुद्र टपकते हुए कतरा-ए-शबनम को देखते है पीते नही…
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