तुम आये हो नज्म - महारुद्र
तुम आये हो
पूरे आसमाँ भर मे
उजाला हो गया है
पूनम की रात हो जैसे
बादलों के पीछे चाँद
मुस्कुरा रहा है।
यहाँ धड़कने थम गई है,
मेरी सांस रुकी है पलभर
आपकी हँसी देख
फुले न समा रही है।
फिर डर गई है मेरी नज़र
हमेशा की तरह पलकों के भीतर
देख आपको जाने पहचाने
अनजान बन रही है
किसी राह चलते मुसाफिर की तरह
खुद संभलते हुए।
कल मिले तो आप
क्या कहूं यही सोच
पूरी रात जुगनू की तरह
जल रही है
मेरी आँखें इन अंधेरों में ।
Written By
― Maharudra Doiphode
Copyright © 2020 Maharudra Doiphode.
Poet - Maharudra Doiphode
"Maharudra Doiphpde Kavita"
"Tum Aaye Ho Pure Aasmaan Bhar Me Ujala Ho Gaya Hai Nazm Maharudra Doiphode"
"Maharudra Doiphode Nazm"
"Tum Aaye Ho - Nazm"

0 Comments