मैं जुगनू सा, तुम रजनी हो - महारुद्र
तुम गीत हो, तुम बासरी हो
तुम ताल हो, सुर, धुन हो, तुम शायरी हो
तुम हृदय हो, तुम प्राण हो
तुम जिंदगी, तुम जान हो
तुम सांस हो, तुम विश्वास हो
मैं बेकस, तुम तलाश हो
तुम इनायत, तुम परस्तिश हो
रहम-ओ-करम, तुम गुजारिश हो
बे नजीर हो, तुम पाकीजा हो
तुम गैरत हो, तुम खजालत हो
फूलों की क्यारी हो, तुम जलज हो
मैं मुलाजिम, तुम शहजादी हो
रूठे हुए ख्वाब हो, तुम ठहरे हुए जवाब हो
मैं छोटा एक किस्सा हु , तुम शब्दों का दौर हो
तुम जादू हो, तुम खुशबू हो
मैं पाबंद, तुम बेकाबू हो
वेद हो, तुम पुराण हो
गीता हो, तुम ईमान हो
तुम चाँद हो, तुम चांदनी हो
मैं जुगनू सा, तुम रजनी हो ।
Poet - Maharudra Doiphode
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