हर बात मुझको उसकी - महारुद्र
रंग-ए-शहाब होकर यू मुस्कुरा रही है
एक नाज़नीन खामोशी मुझको सता रही है
पलकों में बंद करके, मुझे रख लिया है उसने
नजाने कुछ कहके, आवाज़ लगा रही है
मेरे बात बात की शायद खबर है उसको
सबकुछ जानकर भी क्यों बे-ख़बर हो रही है ?
पूछती है मुझसे ऐसे वही बात बार बार
फिर याद दिलाने मुझको, याद दिला रही हैं
तू है इसी शहर में, यही है सहारा मुझको
शब-ए-विसाल मेरी नींदे उड़ा रही है
आफताब देख मैं तो हैरान रह गया हूँ
सामने मेरे रुख से उठाए नक़ाब आ रही हैं
शाम-ओ-सहर है मेरी दुआ मे नाम उसका
मेरी ए दीवानगी भी मुझे दुआ सी लग रही है
हो जा रहा हूँ खुद से दूर मैं कुछ ऐसे
इतने क़रीब मुझसे ओ गुजर रही हैं
रखने लगी है ताल्लुक मुझसे ओ कुछ ज़्यादा
हर बात मुझको उसकी समझ आ रही हैं ।
Poet - Maharudra Doiphode
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"Har Baat Mujhko Uski Hindi Poem"
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