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प्यार बहोत महंगा है - राहत indori

आज तक तुमने खिलौने ही ख़रीदे होंगे दिल है ये दिल मेरे सरकार बहुत महंगा है

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ - Ranjish Hi Sahi Dil Dukhane Ke Liye Aa Ahmad Faraz

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ - अहमद फराज


रंजिश  ही  सही  दिल  ही  दुखाने  के  लिए  आ 
आ   फिर  से  मुझे  छोड़  के  जाने  के  लिए आ 

कुछ  तो  मिरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख 
तू  भी  तो  कभी  मुझ  को  मनाने  के  लिए  आ 

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पहले  से  मरासिम  न  सही  फिर  भी  कभी तो 
रस्म-ओ-रह-ए-दुनिया  ही निभाने  के  लिए  आ 

किस किस  को  बताएँगे  जुदाई  का  सबब हम 
तू   मुझ   से  ख़फ़ा  है  तो  ज़माने  के  लिए  आ 

इक  उम्र  से   हूँ   लज़्ज़त-ए-गिर्या  से  भी  महरूम 
अब तक दिल-ए-ख़ुश-फ़हम को तुझ से हैं उम्मीदें 

ये  आख़िरी   शमाएँ   भी   बुझाने   के  लिए  आ 
ऐ राहत-ए-जाँ   मुझ   को  रुलाने  के  लिए  आ 

Ranjish Hi Sahi Dil Dukhane Ke Liye Aa Aa Phir Se Mujhe Chhod Jane Ke Liye Aa Ahmad Faraz Gazal


"Ahmad Faraaz Poetry"

"Ahmad Faraz Gazals"

"Maharudra Doiphode Poems"


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