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प्यार बहोत महंगा है - राहत indori

आज तक तुमने खिलौने ही ख़रीदे होंगे दिल है ये दिल मेरे सरकार बहुत महंगा है

दर्द हल्का है साँस भारी है - Dard Halka Hai Sans Bhari Hai Gazal Gulzar

दर्द हल्का है साँस भारी है - गुलजार

दर्द  हल्का  है  साँस  भारी  है 
जिए  जाने  की  रस्म  जारी  है 

आप के बाद  हर  घड़ी  हम ने 
आप  के  साथ  ही   गुज़ारी  है 

रात  को चाँदनी  तो  ओढ़ा  दो 
दिन की चादर  अभी  उतारी है

शाख़ पर कोई क़हक़हा तो खिले 
कैसी  चुप  सी चमन  पे तारी है

कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था 
आज   की  दास्ताँ   हमारी  है 

Dird Halka Hai Sans Bhari Hai Jiye Jane Ki Rasm Jari Hai Gulazar Poetry

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